कई महीनों बाद आपसे ख़्वाब में मुलाकात हुई थी। आपके और हमारे दरम्या जो हुआ बस वही यहाँ बता रहा हूँ और यहाँ झूठ का तनिको लवलेसी नहीं होगा काहें कि आपको तो पता ही है कि हम कभी झूठ नहीं बोलते।
आज ही की बात है रात धीरे धीरे अवसान की ओर बढ़ रही थी समझ लीजिए भोर हो गयी थी तभी आप हमारे ख़्वाब में आयीं। मेरे साथ मेरा दोस्त भी था जिसका चेहरा याद नहीं आ रहा। अब क्या बताएँ सपने में तो कुछ भी होता है आपके घर के पास ही कवनो बड़का फंक्शन था जिसमें हम दोनों गये थे। अचानक हमें आपकी याद आयी और हमने दोस्त से कहा कि....का घर भी यहीं होना चाहिए तब तक आप दिख ही गयीं। अब गुस्ताखी माफ करिएगा लेकिन सच बताऊँ तो मैंने आपको पहचाना ही नहीं। यकीन मानिए आप बिल्कुल बदल गयी थीं। आपने साड़ी पहनी थीं और एकदम पहचान में नहीं आ रही थीं। लेकिन भला हो उस दोस्त का जिसने मुझे विश्वास दिलाया कि ये आप ही हैं फिर आपसे बात शुरू हो गयी।
अब सपने की एक एक बात याद नहीं रहती न, भूल जाती है तो जो याद है वो बताता हूँ।
राय साहब- हैलो, कैसी हो?
गुप्ता जी- अच्छी हूँ तुम कैसे हो(सर झुकाकर नजरे बचाते हुए)
राय साहब- जी ठीक ही हूँ बस बीत रहा है। आपका क्या चल रहा है आजकल।
गुप्ता जी- कुछ खास नहीं।
राय साहब- अच्छा तुम्हें कभी मेरी याद नहीं आती, बात करने का मन नहीं करता?(ये सवाल मैं हमेशा करता हूँ)
गुप्ता जी- नहीं कभी कभी थोड़ी बहुत याद आती है(सर को एकदम से नीचे करते हुए, शायद तब तक आँखों में पानी आ गया था)
राय साहब- तो फिर याद आती है तो बात क्यों नहीं करती? फोन या मैसेज क्यों नहीं करती?
गुप्ता जी- एक बार सोचा कि मैसेज करूँ लेकिन फिर न कर सकी(टेबल पर पड़ी कॉपी पर कलम से उल्टी सीधी लाइन खींचते हुए)
राय साहब- नहीं मैसेज जरुर करना पक्का करना। करोगी न?
गुप्ता जी- हूँ....(सर को हिलाते हुए)
तब तक दोस्त जाने के लिए बुलाने लगा टाइम ज्यादा हो रहा था।
राय साहब- ठीक है मैं चलता हूँ और कम से कम मैसेज जरूर करना।
उसके बाद मैंने कॉपी तुम्हारे हाथ से छीनकर उसके वो दोनों पन्ने फाड़ लिये जिसपर तुमने लाइने खींची थी और कहा- मेरे लिए तुम्हारी यही निशानी बहुत है।
फिर मैं पीछे मुड़ा और वहाँ से निकल गया यहाँ तक कि पीछे मुड़ कर भी नहीं देखा क्योंकि मेरे पास इतनी हिम्मत नहीं थी। अगर उस स्थिती के अनुसार सोचूँ तो शायद तुम रो रही होगी।
ए गुप्ता जी, सच कहता हूँ वो आपके दो पन्ने लेने के बाद और आपसे बात करने के बाद ऐसा लगा जैसे मुझे स्वर्ग ही मिल गया। मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि आप मुझसे इतने अच्छे से बात करेंगी शायद हमारे बीच कुछ और बातें भी हुई थीं जो मुझे याद नहीं आ रही हैं।
पर सपना तो सपना होता है तुरंत टूट गया, नींद खुली तो देखा दुनिया वैसी ही वीरान है। सच बताता हूँ ऐसा लगा कि किसीने पूरी जिंदगी की कमाई छीन ली। सच कहता हूँ मैं आपके बिना हर एक पल मरता जा रहा हूँ और मुझे आपसे चाहिए भी क्या, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए आपका बस एक मैसेज ही काफी है पर छोड़ो...राय साहब ये तुम्हारे नसीब में कहाँ....!
आज ही की बात है रात धीरे धीरे अवसान की ओर बढ़ रही थी समझ लीजिए भोर हो गयी थी तभी आप हमारे ख़्वाब में आयीं। मेरे साथ मेरा दोस्त भी था जिसका चेहरा याद नहीं आ रहा। अब क्या बताएँ सपने में तो कुछ भी होता है आपके घर के पास ही कवनो बड़का फंक्शन था जिसमें हम दोनों गये थे। अचानक हमें आपकी याद आयी और हमने दोस्त से कहा कि....का घर भी यहीं होना चाहिए तब तक आप दिख ही गयीं। अब गुस्ताखी माफ करिएगा लेकिन सच बताऊँ तो मैंने आपको पहचाना ही नहीं। यकीन मानिए आप बिल्कुल बदल गयी थीं। आपने साड़ी पहनी थीं और एकदम पहचान में नहीं आ रही थीं। लेकिन भला हो उस दोस्त का जिसने मुझे विश्वास दिलाया कि ये आप ही हैं फिर आपसे बात शुरू हो गयी।
अब सपने की एक एक बात याद नहीं रहती न, भूल जाती है तो जो याद है वो बताता हूँ।
राय साहब- हैलो, कैसी हो?
गुप्ता जी- अच्छी हूँ तुम कैसे हो(सर झुकाकर नजरे बचाते हुए)
राय साहब- जी ठीक ही हूँ बस बीत रहा है। आपका क्या चल रहा है आजकल।
गुप्ता जी- कुछ खास नहीं।
राय साहब- अच्छा तुम्हें कभी मेरी याद नहीं आती, बात करने का मन नहीं करता?(ये सवाल मैं हमेशा करता हूँ)
गुप्ता जी- नहीं कभी कभी थोड़ी बहुत याद आती है(सर को एकदम से नीचे करते हुए, शायद तब तक आँखों में पानी आ गया था)
राय साहब- तो फिर याद आती है तो बात क्यों नहीं करती? फोन या मैसेज क्यों नहीं करती?
गुप्ता जी- एक बार सोचा कि मैसेज करूँ लेकिन फिर न कर सकी(टेबल पर पड़ी कॉपी पर कलम से उल्टी सीधी लाइन खींचते हुए)
राय साहब- नहीं मैसेज जरुर करना पक्का करना। करोगी न?
गुप्ता जी- हूँ....(सर को हिलाते हुए)
तब तक दोस्त जाने के लिए बुलाने लगा टाइम ज्यादा हो रहा था।
राय साहब- ठीक है मैं चलता हूँ और कम से कम मैसेज जरूर करना।
उसके बाद मैंने कॉपी तुम्हारे हाथ से छीनकर उसके वो दोनों पन्ने फाड़ लिये जिसपर तुमने लाइने खींची थी और कहा- मेरे लिए तुम्हारी यही निशानी बहुत है।
फिर मैं पीछे मुड़ा और वहाँ से निकल गया यहाँ तक कि पीछे मुड़ कर भी नहीं देखा क्योंकि मेरे पास इतनी हिम्मत नहीं थी। अगर उस स्थिती के अनुसार सोचूँ तो शायद तुम रो रही होगी।
ए गुप्ता जी, सच कहता हूँ वो आपके दो पन्ने लेने के बाद और आपसे बात करने के बाद ऐसा लगा जैसे मुझे स्वर्ग ही मिल गया। मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि आप मुझसे इतने अच्छे से बात करेंगी शायद हमारे बीच कुछ और बातें भी हुई थीं जो मुझे याद नहीं आ रही हैं।
पर सपना तो सपना होता है तुरंत टूट गया, नींद खुली तो देखा दुनिया वैसी ही वीरान है। सच बताता हूँ ऐसा लगा कि किसीने पूरी जिंदगी की कमाई छीन ली। सच कहता हूँ मैं आपके बिना हर एक पल मरता जा रहा हूँ और मुझे आपसे चाहिए भी क्या, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए आपका बस एक मैसेज ही काफी है पर छोड़ो...राय साहब ये तुम्हारे नसीब में कहाँ....!

Comments
Post a Comment