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Showing posts from July, 2018

वो शख़्स जो मेरा क़त्ल करने वाला था

वो शख़्स जो मिरा क़त्ल करने वाला था मैंने अपनी ज़िन्दगी उसके नाम कर दी। मैं जानता था अंजाम अपनी आशिकी का फिर भी जालिम पे रूह कुर्बान कर दी। अभी तक तो सिर्फ सुना ही था इश्क़ को मजा आया जब रातों की नींद हराम कर दी। रस्ते में कोई पूछ न बैठे हालचाल मिरा ये सोचकर ही घर जाने में शाम कर दी। अब तो ये भी होश नहीं है कि होश में हूँ जबसे शेर-ओ-शायरी की दुकान कर दी।