वो शख़्स जो मिरा क़त्ल करने वाला था मैंने अपनी ज़िन्दगी उसके नाम कर दी। मैं जानता था अंजाम अपनी आशिकी का फिर भी जालिम पे रूह कुर्बान कर दी। अभी तक तो सिर्फ सुना ही था इश्क़ को मजा आया जब रातों की नींद हराम कर दी। रस्ते में कोई पूछ न बैठे हालचाल मिरा ये सोचकर ही घर जाने में शाम कर दी। अब तो ये भी होश नहीं है कि होश में हूँ जबसे शेर-ओ-शायरी की दुकान कर दी।
लिखना जुनून है। अंग्रेजी नहीं आती। घोर सामाजिक। पुरानी चीजों का शौक़ीन। अपने लफ़्ज़ों से अपनी पहचान बनाने की कोशिश।