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Showing posts from December, 2017

अपनी पुरातन संस्कृति और सभ्यता को भुलाती युवा पीढ़ी

भारतवर्ष अपनी पुरातन संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों के लिए विश्वप्रसिद्ध है तभी तो भारत को 'विश्वगुरू' की संज्ञा दी गयी है लेकिन आज की नयी पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में अपने संस्कारों, अपनी संस्कृति और अपनी सभ्यता को तेजी से रौंदती जा रही है। एक ओर जहाँ विश्व के अन्य देश भारत की संस्कृति को अपना रहे हैं तो वहीं हम भारतवासी अपनी संस्कृति को भूलकर उन्हीं देशों की संस्कृति को तेजी से अपनाते जा रहे हैं। आधुनिकता की ऐसी हवा चली है कि इस हवा में नयी पीढ़ी के लिए सभ्यता और संस्कृति का बिल्कुल लोप हो चुका है और उनके पास इस विषय में बात करने के लिए भी समय नहीं है जो कि सुखद संकेत नहीं है। आज की नयी पीढ़ी अब पूजा-पाठ पर ध्यान नहीं देती, वर्ण-व्यवस्था को नहीं मानती, अपने माता-पिता, गुरूजनों और बुजूर्गों का आदर नहीं करती, कम उम्र में ही नशा(सिगरेट, शराब, गुटखा) कर देती है। ऐसे तमाम लक्षण हैं जिसे देखते हुए इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि वर्तमान युग में नौजवानों के लिए सभ्यता और संस्कार बिल्कुल गौड़ चीजें हैं। हम इसकी तह में जायें और इसका विश्लेषण करें कि आखिर ऐसा क्यो हो रहा है तो इसके पी...

किसानों की दयनीय होती हालत और उनका इस्तेमाल करती सरकारें

आज देश मे किसानों की जो स्थिती है वह किसी से छुपी नहीं है। दूसरों का पेट भरने वाला किसान आज खुद अपना पेट ही नहीं भर पा रहा। मौसम की मार, फसलों का वाजिब मूल्य न मिलना तथा बैंको और साहूकारों के दबाव के कारण किसानों की आर्थिक हालत साल दर साल खराब होती जा रही है और किसान खेती से विमुख होते जा रहे हैं। कर्ज, गरीबी और भूखमरी के कारण आज किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं। भारत में किसानों की आत्महत्या का मामला 1990 में संज्ञान में आया। अधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इसकी शुरूआत महाराष्ट्र के विदर्भ से हुई जहाँ कपास किसानों की आत्महत्या का मामला सामने आया उसके बाद आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश और पंजाब सहित देश के कई प्रदेशों से किसानों की आत्महत्या की खबरें सामने आने लगीं। हैरत की बात यह है कि किसानों की आत्महत्या का आँकड़ा कम होने की बजाय बढ़ता ही चला गया हमारे देश में हर साल लगभग 20000 किसान अपने प्राणों का अंत कर देते हैं। ध्यान रहे कि ये आँकड़ा बढ़ भी सकता है क्योंकि राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय के अनुसार साल 2009 में ही 17368 किसानों ने आत्महत्या की थी। खेती में हो रहे लगातार नुकसान की व...

दास्तान-ए-ख़्वाब

ए गुप्ता जी, सुनिए न! कई महीनों बाद आपसे ख़्वाब में मुलाकात हुई थी। आपके और हमारे दरम्या जो हुआ बस वही यहाँ बता रहा हूँ और यहाँ झूठ का तनिको लवलेसी नहीं होगा काहें कि आपको तो पता ही है कि हम कभी झूठ नहीं बोलते। आज ही की बात है रात धीरे धीरे अवसान की ओर बढ़ रही थी समझ लीजिए भोर हो गयी थी तभी आप हमारे ख़्वाब में आयीं। मेरे साथ मेरा दोस्त भी था जिसका चेहरा याद नहीं आ रहा। अब क्या बताएँ सपने में तो कुछ भी होता है आपके घर के पास ही कवनो बड़का फंक्शन था जिसमें हम दोनों गये थे। अचानक हमें आपकी याद आयी और हमने दोस्त से कहा कि....का घर भी यहीं होना चाहिए तब तक आप दिख ही गयीं। अब गुस्ताखी माफ करिएगा लेकिन सच बताऊँ तो मैंने आपको पहचाना ही नहीं। यकीन मानिए आप बिल्कुल बदल गयी थीं। आपने साड़ी पहनी थीं और एकदम पहचान में नहीं आ रही थीं। लेकिन भला हो उस दोस्त का जिसने मुझे विश्वास दिलाया कि ये आप ही हैं फिर आपसे बात शुरू हो गयी। अब सपने की एक एक बात याद नहीं रहती न, भूल जाती है तो जो याद है वो बताता हूँ। राय साहब- हैलो, कैसी हो? गुप्ता जी- अच्छी हूँ तुम कैसे हो(सर झुकाकर नजरे बचाते हुए) राय ...