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Showing posts from May, 2018

और जब रात के 3 बज रहे होते हैं

और जब रात के 3 बज रहे होते हैं, जब मैं अपने कमरे में बिल्कुल अकेला होता हूँ, जब किताबों से मन ऊब जाता है, जब गली में और गली के हर घर में सन्नाटा होता है, जब सारे श़हर के साथ तुम भी गहरी नींद में सो रही होती हो और जब मुझे बिल्कुल भी नींद नहीं आती तब अनायास ही तुम्हारी याद आती है और दिल बेचैन सा हो जाता है। चेहरे पर झूठी हँसी के साथ और चंद लोगों के साथ तो सारा दिन गुजार देता हूँ लेकिन शाम के बाद रात आते-आते तुम और तुम्हारी याद मुझ पर भारी पड़ जाती हैं और मैं रोज टूट जाता हूँ, रोज हार जाता हूँ।      style="display:block"      data-ad-client="ca-pub-2116046723162282"      data-ad-slot="4630477015"      data-ad-format="auto"> सच कहूँ तो अब आदत पड़ चुकी है। ज्यादा तड़प, ज्यादा दर्द अब नहीं होता लेकिन कभी कभी बेचैनी ज्यादा बढ़ जाती है तो तुमसे बात करने का, तुम्हें देखने का मन करता है और सच कहूँ तो बहुत मन करता है कभी कभी सोचता हूँ कि तुम्हें देख लूँ, तुमसे मिल लूँ, तुमसे बात कर लूँ लेकिन किस रिश्ते से, किस हक़ से ये भी न...

भारतीय किसान की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से खबर आयी थी कि एक किसान जिनका नाम मूलचंद था, उनकी मौत हो गयी है। हमारा देश बहुत बड़ा है यहाँ लाखों लोग हर रोज मरते होंगे तो सवाल ये है कि इस किसान की मौत में नया क्या है। किसान एक ऐसा प्राणी है जो खुद भूखा रहकर देश का पेट भरता है लेकिन समाज में सबसे उपेक्षित भी वही किसान है इसमें कोई दो राय नहीं है। आजकल के लोग बहुत व्यस्त हो गये हैं उनके पास तो किसी बड़ी हस्ती की मौत पर सोचने का समय नहीं तो एक तुच्छ किसान के बारे में सोचने का समय उनके पास कहाँ होगा।      style="display:block"      data-ad-client="ca-pub-2116046723162282"      data-ad-slot="2205739634"      data-ad-format="auto"> दरअसल पूरी घटना ये थी कि मूलचंद, जिनकी उम्र 65 साल थी, अपना चना बेचने के लिए सरकारी क्रय-विक्रय केंद्र पर गये थे। चार दिन तक लाइन में खड़ा होकर उन्होंने तुलाई के लिए अपनी बारी आने का इंतजार किया लेकिन उनका नंबर नहीं आया। पाँचवे दिन दोपहर में भयंकर धूप और कमजोरी के कारण वो चक्कर खाकर गिर पड़े और मौके...