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Showing posts from March, 2018

शायद

अक्सर रातों को मुझे नींद नहीं आती, अक्सर यूँ ही मैं गुमसुम हो जाता हूँ, अक्सर बैठे-बैठे अचानक किसी के खयालों में खो जाता हूँ, अक्सर अकेले में फूट-फूटकर रो पड़ता हूँ, अक्सर गंगा-यमुना के किनारों पर बैठकर उसकी लहरों को खुद के अंदर महसूस करता हूँ क्योंकि ठीक वैसी ही लहरें मेरे अंदर भी शोर मचा रही हैं, अक्सर ये दुनिया वीरान सी लगती है, अक्सर मैं व्यथित हो जाता हूँ कभी खुद को देखकर, कभी गंगा के गोद में बसे मेरे उस छोटे से गाँव को देखकर तो कभी उस शहर को देखकर, जिसमें फुटपाथ पर सोये लोगों को रात के अंधेरों में गाड़ियों से कुचल दिया जाता है और फिर अक्सर रातों को मुझे नींद नहीं आती! शायद जो मैं हूँ, वो मैं हूँ ही नहीं और शायद जो मैं हूँ वो कोई देख नहीं सकता, कोई समझ नहीं सकता क्योंकि शायद एक हद के बाद मैंने खुद के करीब किसी को आने ही नहीं दिया यहाँ तक कि खुद को भी नहीं क्योंकि मेरे दिल के दरवाजों पर एक बड़ा सा काला ताला लगा है और जिसकी चाबी शायद मैंने कहीं खो दी है उस चाबी को मैं रोज़ ढूंढता हूँ लेकिन वो मुझे कहीं नहीं मिलती क्योंकि शायद किसी शख़्स ने चुराकर उसे अपने पास रख लिया है और शायद व...

नहीं रहे काव्य के हस्ताक्षर कवि केदारनाथ सिंह

तीसरे सप्तक के कवियों में से एक, नयी कविता युग के श्रेष्ठ कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह नहीं रहे। उनका जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। केदारनाथ सिंह का जन्म 1 जुलाई, 1934 को बलिया के चकिया गाँव में हुआ था। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. व पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। लीक से हटकर लिखने वाले, थोड़े शब्दों में ज्यादा कहने वाले, प्रकृति-प्रेमी और अपनी कविताओं में गाँव को जीवित रखने वाले केदारनाथ सिंह की कविताओं ने हिंदी को एक अलग गरिमा प्रदान की है। उनकी सबसे बड़ी खासियत है कि उन्होंने कविता की भाषा सरल बनायी और उसे आम लोगों तक पहुँचाया। साहित्य की दुनिया में सफलता के शिखर तक पहुँचने वाले केदारनाथ सिंह की जीवन-शैली और रहन-सहन बेहद साधारण था। वो खुद को देहाती मानते थे और खुद को देहाती दिखाना ही पसंद करते थे। उनकी कविताओं से जीवन का कोई भी पहलू बचा नहीं है उन्होंने जीवन के हर पहलू का स्पर्श अपनी कविताओं में किया है। केदारनाथ सिंह को नम आँखों से श्रद्धांजलि, क्योंकि 'जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है'- "मैं जा रही हूँ – उसने...