आज बिरजू रोज की अपेक्षा सुबह जल्दी उठ गया था। जल्दी जल्दी गईयों की सानी-पानी करके नित्यक्रिया से निवृत्त होकर वह कमला से बोला, "मेरा कुर्ता, धोती और गमछा संदूक में से निकाल कर रख दो। मैं बस दस मिनट में नहा कर आ रहा हूँ और हाँ सुनो कुछ कलेवा करने के लिए भी जल्दी से तैयार कर देना।" जल्दी जल्दी बाल्टी और लोटा लेकर बिरजू पास के हैंडपंप पर चल पड़ा जिसका प्रयोग सारे मुहल्ले के लोग करते थे। चूँकि आज बिरजू बहुत सुबह आ गया था इसलिए वहाँ ज्यादा भीड़ नहीं थी वरना रोज तो नहाने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता था उस पर भी पीछे से लोग चिल्लाते रहते थे जिसके कारण नहाना भी सही से नहीं होता था। आज का दिन अच्छा था हैंडपंप के आस पास बस दो-तीन लोग दातुन कर रहे थे और एक-दो लोग शौचादि के पश्चात हाथ पैर धो रहे थे। बिरजू ने जल्दी जल्दी बाल्टी भरी और कुर्ता खोलकर उसकी जेब से साबुन निकाला। जब भी किसी रिश्तेदारी में या किसी विशेष कार्यक्रम में जाना होता तो वह अपने आप को खूब सँवारने की कोशिश करता। साबुन लगा-लगाकर अपने शरीर को चमकाने का प्रयास करता और अपनी फटी एड़ियों को रगड़-रगड़कर चिकना बनाने का...
लिखना जुनून है। अंग्रेजी नहीं आती। घोर सामाजिक। पुरानी चीजों का शौक़ीन। अपने लफ़्ज़ों से अपनी पहचान बनाने की कोशिश।